नई दिल्ली/कोच्चि, 18 सितंबर 2026। हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा और भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे दूसरे अगली पीढ़ी के मिसाइल पोत (Next Generation Missile Vessel–NGMV) की स्टील कटिंग 17 सितंबर को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), कोच्चि में संपन्न हुई।
इस समारोह में युद्धपोत उत्पादन और अधिग्रहण के सहायक नियंत्रक रियर एडमिरल कपिल मेहता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। भारतीय नौसेना और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
आधुनिक हथियारों और सेंसर से लैस होगा NGMV
अगली पीढ़ी के मिसाइल पोत भारतीय नौसेना की भविष्य की समुद्री युद्ध आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे हैं। इन जहाजों को अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों और आधुनिक सेंसर से लैस करने की योजना है।
इनकी तैनाती से भारतीय नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र के जटिल समुद्री वातावरण में प्रभावी ढंग से संचालन करने में सक्षम आधुनिक नौसैनिक प्लेटफॉर्म तैयार करना इस परियोजना का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
मार्च 2023 में हुआ था अनुबंध
NGMV के निर्माण के लिए मार्च 2023 में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ अनुबंध किया गया था। अब दूसरे जहाज की स्टील कटिंग के साथ इसके वास्तविक निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण आगे बढ़ा है।
स्टील कटिंग किसी भी युद्धपोत निर्माण परियोजना में अहम पड़ाव माना जाता है, क्योंकि इसके साथ जहाज के ढांचे के निर्माण की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
स्वदेशी तकनीक बनेगी इन युद्धपोतों की ताकत
NGMV परियोजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका स्वदेशीकरण है। जहाजों के प्रमुख भूमिका-निर्धारक उपकरणों को भारत में ही विकसित और निर्मित किया गया है। इससे भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती तकनीकी और निर्माण क्षमता भी सामने आती है।
यह परियोजना केंद्र सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ पहलों के अनुरूप स्वदेशी रक्षा उत्पादन को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हिंद महासागर में और मजबूत होगी भारतीय नौसेना
हिंद महासागर क्षेत्र भारत के सामरिक और आर्थिक हितों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में आधुनिक हथियारों, सेंसर और स्वदेशी प्रणालियों से लैस अगली पीढ़ी के मिसाइल पोत भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होने के बाद उसकी परिचालन और युद्धक क्षमताओं को नई मजबूती देंगे।
NGMV परियोजना यह भी दर्शाती है कि भारत अब केवल आधुनिक युद्धपोतों के संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के भीतर अत्याधुनिक नौसैनिक प्लेटफॉर्म के डिजाइन, उपकरण निर्माण और युद्धपोत निर्माण की क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है।
NGMV के दूसरे जहाज की स्टील कटिंग के साथ भारत ने आधुनिक, स्वदेशी और भविष्य के लिए तैयार नौसेना के निर्माण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है।





