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सिलिकॉन की दुनिया में भारत की दस्तक: सेमीकंडक्टर शक्ति बनने की ओर बढ़ता भारत

सिलिकॉन की दुनिया में भारत की दस्तक
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नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026। भारत अब केवल दुनिया के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल फोन बनाने वाला देश नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण के वैश्विक मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारका स्थित यशोभूमि में SEMICON India 2026 का उद्घाटन करेंगे। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में दुनिया की प्रमुख चिप कंपनियों के प्रतिनिधि, निवेशक, नीति-निर्माता और तकनीकी विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। इस वर्ष सम्मेलन की थीम “सिलिकॉन से सिस्टम तक: पूरा इकोसिस्टम बनाना” रखी गई है, जो भारत की उस व्यापक रणनीति को दर्शाती है जिसमें चिप निर्माण के साथ-साथ डिजाइन, पैकेजिंग, टेस्टिंग, उपकरण, सप्लाई चेन और कुशल मानव संसाधन को भी विकसित किया जा रहा है।

सेमीकंडक्टर आज आधुनिक अर्थव्यवस्था की आधारभूत तकनीक बन चुके हैं। स्मार्टफोन और कंप्यूटर से लेकर कार, ड्रोन, विमान, MRI मशीन और उपग्रहों तक लगभग हर आधुनिक तकनीकी उपकरण में चिप की महत्वपूर्ण भूमिका है। दुनिया का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग करीब 4.3 ट्रिलियन डॉलर का है और इसके केंद्र में सेमीकंडक्टर उद्योग खड़ा है। कोविड-19 महामारी के दौरान चिप की वैश्विक कमी ने यह स्पष्ट कर दिया कि सेमीकंडक्टर केवल तकनीकी उत्पाद नहीं, बल्कि किसी भी देश की आर्थिक और रणनीतिक क्षमता का महत्वपूर्ण आधार हैं।

भारत ने पिछले एक दशक में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव दर्ज किया है। वर्ष 2014-15 में देश में लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये के इलेक्ट्रॉनिक सामान का उत्पादन होता था, जो 2025-26 तक बढ़कर 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात लगभग 38,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपये हो गया। मोबाइल फोन उत्पादन में भी जबरदस्त वृद्धि हुई और यह 18,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 6.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। मोबाइल फोन का निर्यात लगभग 1,500 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.59 लाख करोड़ रुपये हो गया।

भारत के बदलते इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मोबाइल विनिर्माण है। वर्ष 2014 में स्मार्टफोन भारत के शीर्ष 100 निर्यात उत्पादों में भी शामिल नहीं थे, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में स्मार्टफोन देश का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बन गया। आज भारत में इस्तेमाल होने वाले करीब 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन देश में ही निर्मित होते हैं। भारत मोबाइल फोन के मामले में शुद्ध आयातक से शुद्ध निर्यातक बन चुका है और इस पूरे विनिर्माण क्षेत्र से लगभग 25 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है।

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में मिली सफलता के बाद भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण को अगला रणनीतिक लक्ष्य बनाया। वर्ष 2021 में शुरू किए गए Semicon India Programme के तहत सरकार ने केवल एक-दो चिप फैक्ट्रियां स्थापित करने के बजाय पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को विकसित करने की रणनीति अपनाई। इसके लिए 76,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया, जिसमें चिप डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग, टेस्टिंग, मशीनरी, कच्चे माल और कुशल प्रतिभाओं सहित पूरी वैल्यू चेन को शामिल किया गया। जुलाई 2026 में सरकार ने Semicon 2.0 को मंजूरी दी, जिसके तहत 1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का असर जमीन पर भी दिखाई देने लगा है। छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता है। इन परियोजनाओं में सिलिकॉन और कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट, डिस्प्ले निर्माण और आधुनिक पैकेजिंग जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें से तीन संयंत्रों में व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू हो चुका है। यह संकेत है कि भारत की सेमीकंडक्टर नीति अब केवल योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक औद्योगिक आधार तैयार हो रहा है।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा चिप डिजाइन और प्रतिभा विकास भी है। सरकार ने इस दशक के भीतर 85,000 कुशल सेमीकंडक्टर इंजीनियरों की प्रतिभा तैयार करने का लक्ष्य रखा है। ‘Chips to Startup’ कार्यक्रम के तहत इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन यानी EDA के सॉफ्टवेयर और उपकरण 320 शैक्षणिक संस्थानों में उपलब्ध कराए गए हैं और अब तक 68,000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं को आर्थिक सहायता के लिए मंजूरी मिली है और DLI योजना के तहत 105 स्टार्टअप तथा छोटे-मझोले उद्यमों को EDA टूल्स के लिए सहायता दी गई है।

भारत में चिप डिजाइन की क्षमता को व्यापक बनाने के लिए ChipIN Centre जैसी साझा राष्ट्रीय सुविधा भी विकसित की गई है। इसके माध्यम से देशभर के इंजीनियरों, शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स को आधुनिक चिप डिजाइन टूल्स, निर्माण सेवाओं और प्रशिक्षण की सुविधा मिल रही है। अब तक 500 से अधिक संस्थानों के एक लाख से ज्यादा इंजीनियर इन सुविधाओं का लाभ उठा चुके हैं। इन संस्थानों ने मिलकर 300 से अधिक चिप डिजाइन तैयार किए हैं और चिप डिजाइन टूल्स का चार करोड़ घंटे से अधिक उपयोग किया है। इससे छोटे संस्थानों और स्टार्टअप्स के लिए महंगी तकनीकी सुविधाओं तक पहुंच आसान हुई है।

भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति अब देश की सीमाओं से आगे वैश्विक साझेदारियों तक भी पहुंच रही है। 2026 के India AI Impact Summit के दौरान भारत Pax Silica गठबंधन में शामिल हुआ। इस पहल का उद्देश्य सिलिकॉन और सेमीकंडक्टर की वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है। इसके तहत जरूरी खनिजों, चिप निर्माण, आधुनिक AI सिस्टम और उनसे जुड़े बुनियादी ढांचे तक पूरी ‘सिलिकॉन चेन’ को मजबूत करने पर जोर है।

इसी व्यापक बदलाव की झलक SEMICON India 2026 में दिखाई देगी। यशोभूमि में आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन में 600 से अधिक प्रदर्शक और 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां करीब 15,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज कराएंगी। 150 से अधिक विशेषज्ञ और वक्ता अपने अनुभव साझा करेंगे। छह देशों और 12 राज्यों के पवेलियन के साथ स्टार्टअप शोकेस, छात्रों के लिए हैकाथॉन, तकनीकी प्रतिभा विकास और महिला फोरम जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

सेमीकंडक्टर की दुनिया में भारत की यह यात्रा केवल एक नए उद्योग के निर्माण की कहानी नहीं है। यह उस औद्योगिक परिवर्तन का हिस्सा है जिसमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, चिप डिजाइन, अनुसंधान, प्रतिभा और वैश्विक सप्लाई चेन इन सभी क्षेत्रों में अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। SEMICON India 2026 इसी बदलती तस्वीर का प्रतीक है। भारत अब चिप की वैश्विक कहानी में केवल उपभोक्ता या बाजार की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि डिजाइन से लेकर निर्माण और वैश्विक सप्लाई चेन तक एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

G.D.PANDA

G.D. Panda is the Founder & Editor-in-Chief of GDP News (www.gdpnews.in), which he leads and manages with a clear focus on credible journalism and insightful news analysis. With 20+ years of experience in media, journalism, and ground reporting, he brings strong expertise in Finance, Economics, Current Political Affairs, and contemporary issues. Known for his sharp analytical perspective, extensive field experience, and commitment to responsible journalism, he has established himself as a credible and well-informed media personality, while also actively contributing to society as a dedicated social worker.

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