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₹8.90 लाख की परियोजना से बदली कपिल पाल की जिंदगी, अब मशीनों से सीवर सफाई कर कमा रहे ₹40 हजार तक

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गाजियाबाद, 29 अगस्त 2026। आर्थिक चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बीच अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभा रहे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी कपिल पाल की कहानी आत्मनिर्भरता और मेहनत की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है। नमस्ते योजना के स्वच्छता उद्यमी योजना (SUY) घटक के तहत मिली वित्तीय सहायता ने उन्हें पारंपरिक सफाई कार्य से आगे बढ़कर यांत्रिक सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई का अपना उद्यम शुरू करने का अवसर दिया।

परिवार की जिम्मेदारियों के बीच शुरू किया सफाई का काम

गाजियाबाद जिले के सिहानी क्षेत्र के नूर नगर निवासी 32 वर्षीय कपिल पाल ने 12वीं तक पढ़ाई की है। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने पढ़ाई के बाद सफाई के काम को अपना लिया। कपिल संयुक्त परिवार में पत्नी, दो बच्चों, माता-पिता और बड़े भाई के साथ रहते हैं।

उनकी पत्नी गृहिणी हैं, जबकि परिवार की आय में बड़े भाई का योगदान सीमित है। ऐसे में परिवार के अधिकांश खर्चों की जिम्मेदारी कपिल के कंधों पर थी। उनके चार वर्षीय बेटे और सात वर्षीय बेटी की शिक्षा और भविष्य को लेकर भी वे लगातार चिंतित रहते थे।

पूंजी की कमी बनी सबसे बड़ी चुनौती

सफाई के काम में अनुभव होने के बावजूद कपिल के पास आधुनिक और यांत्रिक उपकरण खरीदने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं थी। सीमित आमदनी और बड़ी पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उनके लिए अपने काम को विस्तार देना मुश्किल था।

इसी बीच कपिल को पीठ की सर्जरी भी करानी पड़ी। इलाज के खर्च ने उनकी आर्थिक परेशानियां और बढ़ा दीं। ऐसे समय में उन्हें ऐसी सहायता की जरूरत थी, जिससे वे अपनी आजीविका को मजबूत करने के साथ भविष्य के लिए भी बेहतर आय सुनिश्चित कर सकें।

नमस्ते योजना ने दिया स्वरोजगार का नया अवसर

कपिल के लिए बड़ा बदलाव 21 सितंबर 2021 को आया, जब उन्हें नमस्ते योजना के स्वच्छता उद्यमी योजना (SUY) घटक के तहत सहायता मिली।

इस सहायता के माध्यम से उन्हें सफाई संबंधी आजीविका गतिविधियों के लिए ट्रैक्टर-सह-सक्शन मशीन खरीदने के लिए वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ।

इस परियोजना की कुल लागत ₹8.90 लाख थी। इसमें ₹5,42,500 का ऋण और ₹3,47,500 की पूंजीगत सब्सिडी शामिल थी।

मशीन खरीदकर शुरू किया यांत्रिक सफाई का कारोबार

वित्तीय सहायता मिलने के बाद कपिल ने सक्शन मशीन की मदद से अपने काम को नए स्तर पर पहुंचाया। अब वे गाजियाबाद नगर निगम क्षेत्र, विशेष रूप से राज नगर एक्सटेंशन में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई की सेवाएं प्रदान करते हैं।

यांत्रिक उपकरणों के इस्तेमाल से न केवल उनके काम का दायरा बढ़ा, बल्कि उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

₹5,000-₹40,000 नहीं-आमदनी पहुंची ₹35-40 हजार तक

अपने काम को विस्तार देने के बाद कपिल अब लगभग ₹35,000 से ₹40,000 प्रति माह कमा रहे हैं। इस बढ़ी हुई आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को काफी मजबूत किया है।

अब वे अपने बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाने, घरेलू जरूरतें पूरी करने और भविष्य की अप्रत्याशित परिस्थितियों के लिए बचत करने में सक्षम हैं।

कपिल फिलहाल ऋण की लगभग ₹18,640 मासिक किस्त चुका रहे हैं और उनके ऋण में करीब ₹1.21 लाख ही बकाया रह गया है।

अपनी बचत से कराया पीठ का ऑपरेशन

कपिल की बेहतर आर्थिक स्थिति का सबसे बड़ा फायदा उस समय सामने आया जब उन्हें पीठ की सर्जरी करानी पड़ी। अपने सफाई व्यवसाय से हुई बचत के कारण वे परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाले बिना अपने इलाज का खर्च खुद उठाने में सक्षम रहे।

यह उनके लिए केवल आर्थिक मजबूती नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का प्रमाण भी बना।

कपिल बोले- अब बच्चों के भविष्य को लेकर ज्यादा भरोसा

योजना से मिली सहायता के बारे में कपिल पाल ने बताया कि इस मदद से उन्हें अपने सफाई कार्य को विस्तार देने और आय बढ़ाने का अवसर मिला। अब वे करीब ₹35,000 से ₹40,000 हर महीने कमा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इसी काम से की गई बचत से वे अपनी पीठ की सर्जरी का खर्च स्वयं उठा सके और अब परिवार की जरूरतों के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा का खर्च भी बेहतर तरीके से पूरा कर पा रहे हैं।

सफाई कर्मचारी से बने स्वच्छता उद्यमी

कपिल पाल की कहानी इस बात को दर्शाती है कि उचित वित्तीय सहायता, आधुनिक तकनीक और स्वरोजगार के अवसर पारंपरिक सफाई कार्य से जुड़े लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

नमस्ते योजना के तहत मिली सहायता ने कपिल को केवल एक मशीन खरीदने में मदद नहीं की, बल्कि उन्हें स्वच्छता क्षेत्र में अपना उद्यम खड़ा करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया।

आज कपिल न केवल अपने परिवार की जिम्मेदारियां बेहतर तरीके से निभा रहे हैं, बल्कि यांत्रिक माध्यमों से स्वच्छता सेवाएं उपलब्ध कराकर अपने समुदाय के लिए भी योगदान दे रहे हैं। उनकी यात्रा मेहनत, आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आजीविका की प्रेरक कहानी है।

G.D.PANDA

G.D. Panda is the Founder & Editor-in-Chief of GDP News (www.gdpnews.in), which he leads and manages with a clear focus on credible journalism and insightful news analysis. With 20+ years of experience in media, journalism, and ground reporting, he brings strong expertise in Finance, Economics, Current Political Affairs, and contemporary issues. Known for his sharp analytical perspective, extensive field experience, and commitment to responsible journalism, he has established himself as a credible and well-informed media personality, while also actively contributing to society as a dedicated social worker.

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