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₹5 हजार की नौकरी से ₹20 हजार की कमाई तक: NBCFDC के ऋण ने सुनील कुमार की बदली जिंदगी, बने ऑटो रिक्शा मालिक

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नई दिल्ली, 29 अगस्त 2026। सरकारी योजनाओं के जरिए जरूरतमंद और पिछड़े वर्ग के लोगों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की एक प्रेरक तस्वीर केरल से सामने आई है। केरल के ओबीसी थिय्या समुदाय से आने वाले सुनील कुमार केपी ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (NBCFDC) की ऋण योजना का लाभ उठाकर कम वेतन वाली निजी ड्राइवर की नौकरी छोड़कर अपना ऑटो रिक्शा व्यवसाय शुरू किया। इस बदलाव के साथ उनकी मासिक आय चार गुना तक बढ़ गई।

₹5 हजार मासिक कमाई में परिवार चलाना था मुश्किल

सुनील कुमार के पास वाहन चलाने का अनुभव था और वे निजी वाहन चालक के रूप में काम करते थे। हालांकि, उनकी मासिक आय महज ₹5,000 थी। इतनी कम आमदनी में परिवार का खर्च चलाना और भविष्य के लिए बचत करना उनके लिए बड़ी चुनौती थी।

वाहन चलाने का अनुभव होने के बावजूद आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण वे अपना वाहन खरीदकर स्वरोजगार शुरू नहीं कर पा रहे थे। उनकी सबसे बड़ी बाधा आर्थिक थी, जिसके चलते उन्हें लंबे समय तक निजी ड्राइवर की नौकरी पर निर्भर रहना पड़ा।

अपना वाहन खरीदने का था सपना

सुनील की इच्छा थी कि वे अपने ड्राइविंग अनुभव का इस्तेमाल करके खुद का काम शुरू करें। उनका सपना था कि वे एक वाहन खरीदकर स्वरोजगार के जरिए अपनी और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करें।

इसी दौरान वर्ष 2022 में उनकी जिंदगी में महत्वपूर्ण बदलाव आया। उन्हें केरल राज्य पिछड़ा वर्ग विकास निगम (KSBCDC) के माध्यम से राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (NBCFDC) की ऋण योजना की जानकारी मिली।

₹2.69 लाख का ऋण बना बदलाव का आधार

सुनील को योजना के तहत ₹2.69 लाख का सावधि ऋण प्राप्त हुआ। इस आर्थिक सहायता का इस्तेमाल उन्होंने ऑटो रिक्शा खरीदने में किया।

ऑटो रिक्शा खरीदने के बाद सुनील ने स्वयं चालक के रूप में काम शुरू किया। अब उनकी मेहनत और ड्राइविंग का अनुभव सीधे उनके अपने व्यवसाय और आमदनी में बदलने लगा।

₹5 हजार से बढ़कर ₹20 हजार हुई मासिक आय

ऑटो रिक्शा व्यवसाय शुरू करने के बाद सुनील की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। पहले जहां वे महज ₹5,000 प्रति माह कमाते थे, वहीं स्वरोजगार शुरू करने के बाद उनकी मासिक आय बढ़कर लगभग ₹20,000 हो गई।

यानी उनकी आय करीब चार गुना बढ़ी। बढ़ी हुई आमदनी से परिवार के घरेलू खर्च पूरे करना आसान हुआ और उन्हें आर्थिक रूप से पहले की तुलना में अधिक स्थिरता मिली।

सुनील ने जताया सरकार की योजना के प्रति आभार

अपने अनुभव को साझा करते हुए सुनील कुमार केपी ने कहा कि ₹2.69 लाख के सावधि ऋण ने उन्हें अपना ऑटो रिक्शा खरीदने और स्वरोजगार शुरू करने में मदद की। उन्होंने बताया कि ऋण से पहले उनकी मासिक आय ₹5,000 थी, जो ऑटो रिक्शा व्यवसाय शुरू करने के बाद बढ़कर करीब ₹20,000 हो गई। इससे उनके परिवार को बेहतर आर्थिक स्थिरता और जीवन स्तर मिला।

आर्थिक सहायता ने खोला आत्मनिर्भरता का रास्ता

सुनील कुमार की कहानी इस बात का उदाहरण है कि समय पर और किफायती वित्तीय सहायता किसी व्यक्ति के कौशल को स्वरोजगार के अवसर में बदल सकती है। जिन लोगों के पास काम करने का हुनर तो है, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण वे अपना व्यवसाय शुरू नहीं कर पाते, उनके लिए ऐसी ऋण योजनाएं आत्मनिर्भरता का रास्ता खोल सकती हैं।

सुनील ने निजी ड्राइवर के रूप में कम आय वाली नौकरी से शुरुआत की थी, लेकिन उचित वित्तीय सहायता मिलने के बाद वे ऑटो रिक्शा के मालिक और स्वरोजगारित चालक बन गए। उनकी यह यात्रा आर्थिक आत्मनिर्भरता और सरकारी वित्तीय सहायता के प्रभाव की एक प्रेरक मिसाल है।

G.D.PANDA

G.D. Panda is the Founder & Editor-in-Chief of GDP News (www.gdpnews.in), which he leads and manages with a clear focus on credible journalism and insightful news analysis. With 20+ years of experience in media, journalism, and ground reporting, he brings strong expertise in Finance, Economics, Current Political Affairs, and contemporary issues. Known for his sharp analytical perspective, extensive field experience, and commitment to responsible journalism, he has established himself as a credible and well-informed media personality, while also actively contributing to society as a dedicated social worker.

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