नई दिल्ली, 29 अगस्त 2026। भारत की तेजी से बढ़ती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षमता को एक नई दिशा देते हुए उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में ‘ज्ञानी अर्थ’ का शुभारंभ किया। इसे ज्ञानी एआई (Gyani AI) द्वारा विकसित एक स्वतंत्र और संप्रभु AI स्टैक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
‘ज्ञानी अर्थ’ में दो प्रमुख तकनीकी घटक इवोन 3.3 (Evon 3.3) और प्लेक्सस (Plexus) शामिल हैं। इवोन 3.3 एक Large Language Model (LLM) है, जबकि प्लेक्सस AI की क्षमताओं को वास्तविक दुनिया के कार्यों, प्रक्रियाओं और संस्थानों से जोड़ने वाला प्लेटफॉर्म है।
क्या है ‘ज्ञानी अर्थ’?
सरल शब्दों में कहें तो ज्ञानी अर्थ एक ऐसा AI सिस्टम है, जिसका उद्देश्य केवल सवालों के जवाब देना नहीं, बल्कि AI की समझ और क्षमता को वास्तविक दुनिया के कामकाज से जोड़ना है।
इसके दो प्रमुख हिस्से हैं:
1. इवोन 3.3:
यह बड़ा भाषा मॉडल है, जो प्राकृतिक भाषा को समझने, जानकारी का विश्लेषण करने और उपयोगकर्ता के प्रश्नों का उत्तर तैयार करने जैसी AI क्षमताएं प्रदान करता है।
2. प्लेक्सस:
यह AI मॉडल को वास्तविक दुनिया के कार्यों और संस्थागत प्रक्रियाओं से जोड़ने का काम करता है। यानी AI की बुद्धिमत्ता को केवल बातचीत तक सीमित रखने के बजाय उसे व्यावहारिक उपयोग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
कैसे काम करता है ज्ञानी अर्थ?
ज्ञानी अर्थ की कार्यप्रणाली को आसान भाषा में ‘AI दिमाग + वास्तविक दुनिया के काम’ के रूप में समझा जा सकता है।
इवोन 3.3 उपयोगकर्ता के सवाल या निर्देश को समझने और उसका विश्लेषण करने में मदद करता है। इसके बाद प्लेक्सस इस AI क्षमता को संबंधित कार्य, डेटा, प्रक्रिया या संस्थागत जरूरत से जोड़ सकता है।
इस तरह इसका उद्देश्य AI को केवल Chatbot की तरह इस्तेमाल करने के बजाय एक ऐसे प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करना है, जो अलग-अलग क्षेत्रों में वास्तविक काम को अधिक तेज, व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में मदद करे।
किसके काम आएगा?
‘ज्ञानी अर्थ’ जैसी संप्रभु AI तकनीक का उपयोग भविष्य में कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। इसके संभावित उपयोगों में:
- सरकारी विभागों और सार्वजनिक संस्थानों में दस्तावेजों और सूचनाओं के विश्लेषण में मदद।
- शिक्षा क्षेत्र में भारतीय भाषाओं में AI आधारित सेवाएं।
- व्यवसायों में डेटा विश्लेषण, ऑटोमेशन और निर्णय लेने में सहायता।
- डेवलपर्स और टेक कंपनियों के लिए AI आधारित एप्लीकेशन तैयार करने में मदद।
- संस्थानों में प्रक्रियाओं को ऑटोमेट और सुव्यवस्थित करने में सहायता।
- भारतीय भाषाओं में AI के उपयोग को बढ़ावा देने की संभावनाएं।
हालांकि किसी विशेष क्षेत्र में इसका वास्तविक उपयोग इस बात पर निर्भर करेगा कि संस्थान या डेवलपर इसे किन प्रणालियों और डेटा से जोड़ते हैं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
AI के क्षेत्र में दुनिया भर में प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में संप्रभु AI क्षमता का अर्थ केवल विदेशी AI टूल का इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि देश के भीतर AI मॉडल, इंफ्रास्ट्रक्चर और एप्लीकेशन विकसित करने की क्षमता तैयार करना भी है।
उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने इसी आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भारत को हमेशा तकनीक का उपभोक्ता बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसी तकनीक का निर्माण करना चाहिए जिसका उपयोग दुनिया भी कर सके।
उन्होंने कहा कि इंडियाएआई मिशन और AI उत्कृष्टता केंद्रों जैसी पहल भारत के तकनीकी परिवर्तन को गति दे रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और ‘भारत प्रथम’ दृष्टिकोण को भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण बताया।
AI से रोजगार खत्म होंगे या नए अवसर बनेंगे?
AI को लेकर अक्सर रोजगार पर असर की चिंता व्यक्त की जाती है। उपराष्ट्रपति ने कंप्यूटर और IT क्षेत्र के शुरुआती दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि तकनीकी बदलाव के बावजूद IT सेक्टर ने भारत और दुनिया में रोजगार के नए अवसर पैदा किए।
इसी तरह उनका मानना है कि AI भी रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा कर सकता है। AI के विस्तार से AI engineering, data science, automation, cybersecurity, AI research और नए डिजिटल व्यवसायों जैसे क्षेत्रों में अवसर बढ़ने की संभावना है।
संसद में भी बढ़ रहा AI का इस्तेमाल
उपराष्ट्रपति ने संसद में AI के उपयोग का भी उल्लेख किया। डिजिटल संसद पोर्टल के माध्यम से संसदीय बहसों और दस्तावेजों को कई भारतीय भाषाओं में पढ़ा जा सकता है। हाल ही में आठ भाषाओं में AI आधारित अनुवाद सेवा शुरू किए जाने और भविष्य में इसे सभी अनुसूचित भाषाओं तक विस्तारित करने की बात भी कही गई।
‘ज्ञानी अर्थ’ से क्या फायदा होगा?
‘ज्ञानी अर्थ’ जैसे AI स्टैक का सबसे बड़ा संभावित फायदा यह है कि AI की क्षमताओं को भारतीय जरूरतों और संस्थागत कार्यप्रणालियों के अनुरूप विकसित किया जा सकता है।
इसके प्रमुख संभावित फायदे हैं:
✔ तकनीकी आत्मनिर्भरता: विदेशी AI तकनीकों पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम।
✔ भारतीय AI इकोसिस्टम: देश में AI मॉडल और एप्लीकेशन विकसित करने को बढ़ावा।
✔ उत्पादकता में वृद्धि: दोहराए जाने वाले कार्यों को AI के जरिए अधिक कुशल बनाया जा सकता है।
✔ भारतीय भाषाओं को बढ़ावा: AI सेवाओं को अधिक भारतीय भाषाओं तक पहुंचाने की संभावना।
✔ संस्थागत उपयोग: सरकारी और निजी संस्थानों में AI आधारित कार्यप्रवाह विकसित किए जा सकते हैं।
✔ नवाचार और स्टार्टअप: डेवलपर्स और उद्यमियों के लिए नए AI आधारित उत्पाद और सेवाएं बनाने के अवसर।
विकसित भारत @2047 में AI की भूमिका
उपराष्ट्रपति ने कहा कि तकनीकी क्षमता विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की दिशा में भारत की यात्रा का महत्वपूर्ण स्तंभ होगी। उनके अनुसार, ‘ज्ञानी अर्थ’ केवल एक AI प्लेटफॉर्म का लॉन्च नहीं बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता, नवाचार और वैश्विक AI नेतृत्व की व्यापक राष्ट्रीय यात्रा का हिस्सा है।
उन्होंने ज्ञानी AI के CEO श्री गणेश गोपालन और सह-संस्थापक एवं CTO श्री अनंत नागराज को इस पहल के लिए बधाई दी और उम्मीद जताई कि यह भारत को अधिक मजबूत, आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने में योगदान देगा।
‘ज्ञानी अर्थ’ का लॉन्च भारत में संप्रभु AI क्षमता विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। इवोन 3.3 की भाषा और AI समझ तथा प्लेक्सस की वास्तविक दुनिया के कार्यों से कनेक्टिविटी को एक साथ लाने का उद्देश्य AI को केवल जानकारी देने वाली तकनीक से आगे ले जाकर व्यावहारिक और संस्थागत उपयोग के लिए सक्षम बनाना है।
अगर भारत इस तरह के स्वदेशी AI मॉडल, प्लेटफॉर्म और कंप्यूटिंग इकोसिस्टम को बड़े पैमाने पर विकसित करने में सफल होता है, तो आने वाले वर्षों में AI डिजिटल अर्थव्यवस्था, प्रशासन, शिक्षा, उद्योग और नवाचार के साथ-साथ विकसित भारत @2047 की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।





