नई दिल्ली, 25 अगस्त। गर्भावस्था और प्रसवोत्तर अवधि में महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य एवं कल्याण संबंधी सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। आयुष मंत्रालय के अधीन स्वायत्त प्रमुख संस्थान AIIA ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ‘गर्भिणी मित्र’ पाठ्यक्रम शुरू किया है।
छह महीने का यह ऑफलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयुर्वेद की पारंपरिक अवधारणाओं और आधुनिक स्वास्थ्य सहायता कौशल के समन्वय पर आधारित है। इसका उद्देश्य ऐसे प्रशिक्षित कर्मियों को तैयार करना है, जो गर्भवती महिलाओं को उचित स्वास्थ्य शिक्षा, आहार एवं जीवनशैली संबंधी मार्गदर्शन और सामुदायिक स्तर पर सहायता प्रदान कर सकें।
क्या है ‘गर्भिणी मित्र’ पाठ्यक्रम?
‘गर्भिणी मित्र’ एक स्किल डेवलपमेंट आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसमें प्रतिभागियों को गर्भावस्था और प्रसव के बाद महिलाओं की आवश्यकताओं को समझने तथा उन्हें उचित स्वास्थ्य संबंधी सहायता देने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यह पाठ्यक्रम मुख्य रूप से आयुर्वेद की तीन महत्वपूर्ण अवधारणाओं पर आधारित है:
- गर्भिणी परिचर्या : गर्भावस्था के दौरान देखभाल
- सूतिका परिचर्या : प्रसव के बाद मां की देखभाल
- गर्भाधान विधि : गर्भधारण से पूर्व की देखभाल
इसका उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को व्यवस्थित प्रशिक्षण के माध्यम से समुदाय तक पहुंचाना है।
छह महीने की ट्रेनिंग में क्या सिखाया जाएगा?
यह ऑफलाइन पाठ्यक्रम छह महीने का होगा और नई दिल्ली के सरिता विहार स्थित AIIA परिसर में संचालित किया जाएगा। प्रशिक्षण सोमवार से शुक्रवार तक दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक होगा।
प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को गर्भावस्था की अलग-अलग तिमाहियों के अनुसार कई महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी जाएगी। इनमें शामिल हैं-
आहार और पोषण:
गर्भावस्था के विभिन्न चरणों में उचित आहार और पोषण संबंधी आवश्यकताओं की समझ विकसित की जाएगी।
जीवनशैली मार्गदर्शन:
गर्भावस्था के दौरान आवश्यक जीवनशैली संबंधी सावधानियों और स्वस्थ दिनचर्या के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सुरक्षित योग:
गर्भावस्था के दौरान उपयुक्त एवं सुरक्षित योग अभ्यासों की जानकारी दी जाएगी।
भावनात्मक सहयोग:
प्रसव के समय महिला को भावनात्मक एवं मानसिक सहयोग देने के बुनियादी तरीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
नवजात शिशु की देखभाल:
नवजात शिशु की मालिश और शुरुआती देखभाल से संबंधित व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी।
बुनियादी जीवन रक्षक सहायता:
जरूरत पड़ने पर प्रारंभिक सहायता उपलब्ध कराने से जुड़े बुनियादी प्रोटोकॉल का प्रशिक्षण भी पाठ्यक्रम का हिस्सा होगा।
इसके अलावा संक्रमण नियंत्रण, स्वच्छता एवं सैनिटाइजेशन, जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट प्रबंधन और कार्यस्थल सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
कौन कर सकता है आवेदन?
‘गर्भिणी मित्र’ पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए उम्मीदवार का किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से सीनियर सेकेंडरी यानी 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। उम्मीदवार की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
जो विद्यार्थी वर्तमान में 12वीं कक्षा के परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं, वे भी अनंतिम आवेदन जमा कर सकते हैं।
प्रत्येक बैच में 20 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा, जिससे प्रशिक्षण को अपेक्षाकृत छोटे समूह में व्यावहारिक और प्रभावी तरीके से संचालित किया जा सके।
प्रशिक्षण के बाद रोजगार के अवसर
पाठ्यक्रम पूरा करने वाले अभ्यर्थी विभिन्न स्वास्थ्य एवं सामुदायिक संस्थानों में सहायता संबंधी भूमिकाओं में काम कर सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से–
- गर्भिणी मित्र सहायक
- प्रसवपूर्व एवं प्रसवोत्तर देखभाल सहायक
- प्रसवपूर्व स्वास्थ्य एवं कल्याण मार्गदर्शक
- मातृ स्वास्थ्य सहायता कर्मी
जैसी भूमिकाएं शामिल हैं।
प्रशिक्षित कर्मियों के लिए आयुष केंद्रों, प्रसूति क्लीनिकों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), सामुदायिक स्वास्थ्य परियोजनाओं तथा स्वास्थ्य एवं कल्याण संस्थानों में अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।
महत्वपूर्ण बात: यह चिकित्सकीय देखभाल का विकल्प नहीं
AIIA ने स्पष्ट किया है कि ‘गर्भिणी मित्र’ पहल नियमित चिकित्सकीय प्रसवपूर्व देखभाल का विकल्प नहीं, बल्कि उसका पूरक है।
गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य जांच, आवश्यक नैदानिक परीक्षण तथा ब्लड प्रेशर और हीमोग्लोबिन की निगरानी जरूरी बनी रहती है।
प्रशिक्षित गर्भिणी मित्रों की भूमिका मुख्य रूप से महिलाओं को सही स्वास्थ्य जानकारी और सहयोग उपलब्ध कराने, संभावित चेतावनी संकेतों को पहचानने तथा आवश्यकता पड़ने पर योग्य चिकित्सकों और स्वास्थ्य केंद्रों तक समय पर रेफर करने में सहायता करना है।
इसका मतलब यह है कि गंभीर या असामान्य स्वास्थ्य स्थिति में प्रशिक्षित सहायक स्वयं उपचार करने के बजाय महिला को उचित चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने में मदद करेगी।
आयुर्वेद और सामुदायिक स्वास्थ्य के बीच सेतु
‘गर्भिणी मित्र’ पाठ्यक्रम की खासियत यह है कि इसमें आयुर्वेद की पारंपरिक अवधारणाओं को व्यवस्थित प्रशिक्षण और बुनियादी स्वास्थ्य सहायता कौशल के साथ जोड़ा गया है।
भारत में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मजबूत करने के लिए केवल अस्पतालों और चिकित्सकों की भूमिका ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि समुदाय स्तर पर सही जानकारी, समय पर पहचान और उचित रेफरल व्यवस्था भी बेहद अहम है।
इसी दृष्टि से ‘गर्भिणी मित्र’ जैसी पहल प्रशिक्षित स्वास्थ्य सहायता कर्मियों का एक ऐसा नेटवर्क विकसित करने में मदद कर सकती है, जो गर्भवती महिलाओं और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच एक प्रभावी सहयोगी कड़ी के रूप में काम करे।





