
असम में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा के नेतृत्व में बीजेपी ने लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर एक ‘विशेषाधिकार प्राप्त राज्य’ का दर्जा हासिल कर लिया है. ऐतिहासिक जीत के बाद ‘सीएनएन-न्यूज18’ से खास बातचीत में मुख्यमंत्री ने कई बड़े खुलासे किए. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह जीत भरोसे और विकास की है. हिमंता ने कांग्रेस के वोट बैंक की राजनीति पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने बताया कि कैसे बीजेपी ने असम में 49 प्रतिशत से ज्यादा वोट शेयर हासिल कर विपक्ष के तमाम समीकरणों को ध्वस्त कर दिया. इस इंटरव्यू में उन्होंने गौरव गोगोई के साथ चल रहे दस्तावेजों के विवाद से लेकर पश्चिम बंगाल में बीजेपी की बढ़ती ताकत पर विस्तार से चर्चा की.
असम की राजनीति में 40 परसेंट का बैरियर कैसे टूटा?
असम के मुख्यमंत्री ने अपनी रणनीति साझा करते हुए बताया कि चुनाव से पहले अक्सर 40 प्रतिशत वोट शेयर की बात की जाती थी. उन्होंने कहा कि विपक्षी दल केवल इसी आंकड़े के इर्द-गिर्द सिमटे हुए थे. लेकिन बीजेपी और एनडीए ने इस बार 49 प्रतिशत से ज्यादा वोट हासिल कर सबको चौंका दिया है. मुख्यमंत्री के अनुसार यह जीत इसलिए मुमकिन हुई क्योंकि हिंदू समुदाय और असमिया मुस्लिम समाज ने एकजुट होकर बीजेपी के पक्ष में मतदान किया. उन्होंने बताया कि असम का समाज जाति और पंथ की राजनीति से ऊपर उठ चुका है. जब विपक्ष 40 प्रतिशत के वोट बैंक पर भरोसा कर रहा था, तब बीजेपी ने बाकी के 60 प्रतिशत को एकजुट करने का काम किया. यही वजह है कि बीजेपी को कांग्रेस के मुकाबले 16 प्रतिशत ज्यादा वोट और 80 सीटें अधिक मिली हैं.





